खैट खाल मंदिर के पास पहाड़ियों पर आती हैं परियां ...
खैट खाल मंदिर के पास पहाड़ियों पर आती हैं परियां 10 हजार फिट की ऊंचाई पर स्थित है खैट पर्वत
हर साल जून में लगता है यहाँ बड़ा मेला भिलंगना नदी की घाटी में अठखेलियां करती हैं 'वनदेवियां'
कुदरती आपदाओं से बचने के लिए होती है पूजा आज की आधुनिकता में जहां हम भगवान पर विश्वास नहीं करते हैं वहीं उत्तराखंड की धरती में कुछ ऐसी जगहें हैं जो अपने रहस्यो से आपको चौंका देंगी
हम बात कर रहे हैं खैट पर्वत की जो कि परियो की दुनिया के रूप में जाना जाता है.खैट पर्वत में अपसराओ की वास माना जाता है खैट पर्वत अपने रहस्य और रोमांच के लिए जाना जाता है
खैट पर्वत जाने के लिए ऋषिकेश से बस और टैक्सी से पहुंचा जा सकता है खैट पर्वत समुद्रतल से 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है खैट पर्वत के नीचे भिलंगना नदी बहती है
खैट पर्वत गुंबद के आकार का पहाड़ है खैट पर्वत की नौ श्रृंखलाओं हैं जिनमें नौ देवियों का निवास माना जाता है,इन देवियो को भराड़ी देवी भी कहा जाता है!
यहां पहुचते ही आपको हिमालय की ऊंची ऊंची चोटियां नजर आयेंगी.गढ़वाल में वनदेवियों को आछरी-मांतरी के नाम से कहा जाता है।
स्थीय लोग किसी भी प्राकृतिक भी आपदा व अनर्थ से बचने के लिए पहाड़वासी वनदेवियों को समय-समय पर पूजते हैं। इससे ये वनदेवियां खुश रहती हैं।
इस चोटी में मखमली घास से ढका एक खूबसूरत मैदान है। यहाँ दिखेंगी आपको ऊँची चट्टानों पर उल्टी ओखलें, और लहसुन की खेती अखरोट के बागान देखने को मिलेगें चौखुडू चौन्तुरु जहाँ अपसराये नृत्य करती है !!